सन्तो की शिक्षा
सन्तो की शिक्षा से लोक व परलोक दोनों सुधरते है सन्त का जीवन मे आना परम् मंगलकारी होता हैं। जीवन में अगर संतों, की शिक्षाओं को अपना लिया जाए तो जीवन खुशहाल बन जाता है। केवल सुनने और सुनाने से ही काम नहीं होता, बल्कि जीवन को व्यावहारिक रूप देने से ही जीवन महान बनता है। सन्तो की दी हुई शिक्षा पर अमल करने से लोक व परलोक दोनों सुधरते हैं। इस पर क्लिक करें कबीर साहेब जी कहते है कि दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार, तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार। अर्थ : इस संसार में मनुष्य का जन्म मुश्किल से मिलता है. यह मानव शरीर उसी तरह बार-बार नहीं मिलता जैसे वृक्ष से पत्ता झड़ जाए तो दोबारा डाल पर नहीं लगता. सन्तो की संगत करने से ही मनुष्य जीवन के मूल उद्देश्य की जानकारी होती हैं । वह परमात्मा को प्राप्त करने के लिए लालायित होकर सुभ कर्म करने लग जाता हैं और जिससे उसका यह जीवन भी सुखदायक हो जाता हैं औऱ परलोक का रास्ता भी सुगम हो जाता हैं। समाज सुधार में सन्तों की शिक...