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Showing posts from May, 2020

आदिमानव से आधुनिक मानव

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इस संसार में अनेक प्रकार के प्राणी हैं जिनमें से एक मनुष्य है। "मनुष्य" उसे कहते हैं जिसमें मनन करने का गुण व शक्ति होती हैं। सभी जीवों में केवल मनुष्य ही है जो अपने विवेक शक्ति का प्रयोग कर सही व गलत का निर्णय स्वयं कर सकता हैं। मानव का उत्थान समय के साथ धीरे धीरे होते अा रहा हैं। आदिकाल से लेकर अब तक मनुष्य में बहुत ही बदलाव देखने को मिला है, चाहे वह शारीरिक बनावट हो, विवेक शक्ति, या आपस में समूहों (समाज) में एक साथ रहना। धीरे धीरे मनुष्य समाज में एक साथ  रह कर अपने विवेक शक्ति से अच्छे और बुरे की पहचान कर सकें है। मानव की वर्तमान स्थिति आज का मानव शिक्षित होते हुए भी स्वयं सही गलत की पहचान नहीं कर पा रहा हैं। वर्तमान स्थिति के मावन में भगवान का डर नहीं रहा। वह दूसरों की गलती पर तो बोलता है कि भगवान सब देख रहा हैं, लेकिन खुद दूसरो का बूरा करते हुए इस बात को नहीं याद रखता हैै। वर्तमान में मानव चोरी, डकैती, रिश्वतखोरी, बलात्कार, जीव हिंसा जैसे कुकर्मों को बटोरता जा रहा हैं। और अपने ही कर्म बिगाड़ता जा रहा हैं। कहते है की मानव की असली कमाई उसके अच्छे कर्म, पुण्य ...

Level of education

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•शिक्षा का अर्थ" ज्ञान प्राप्त करना जो कि जीवन में उपयोगी हैं। शिक्षा हमारे जीवन का अभिन्न अंग है हमारी पहली शिक्षा घर से ही शुरू होती हैं। हमारे व्यवहार में जो दिखाई देता है वह हमारे शिक्षा का ही रूप है। शिक्षा के अच्छे और बुरे स्तर के लिए सबसे पहले ज़िम्मेदार अपने घर के अभिभावक होते हैं। क्योंकि बच्चे सबसे पहले अपने अभिभावकों से ही सीखते हैं। जैसे कहते हैं ना, जैसे खावे अन्न वैसे बने मन। इसी प्रकार बच्चो को घर जो प्राथमिक शिक्षा व सामाजिक शिक्षा जाती हैं उसे ही वे अपने जीवन में उतारते हैं। सामाजिक शिक्षा के बाद आती है स्कूली शिक्षा जहा किताबी ज्ञान हमे प्राप्त होता है। लेकिन आज कि बढ़ती हुई टेक्नोलोजी से हमें अच्छी शिक्षा तो प्राप्त हो रही हैं लेकिन हम ज्ञानी अर्थात विद्वान नहीं हो रहे हैं। जैसे कि आधुनिकता में सब डिजिटल होने से अपनी तर्क शक्ति को खोते जा रहे हैं। ...कुछ चीज का उत्तर चाहिए तो सीधे गूगल में खोज लेते हैं। अपने तर्क शिक्षा का उपयोग नहीं कर पाते हैं। शिक्षा की आधुनिकता ने लोगो को काफ़ी लाभ दिए हैं वहीं इसके बहुत सी हानि को भी लोगों को ही भुगतना पड़ा है। •...

कलियुग में सतयुग

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"वाल्मीक तुलसी से कह गये, ऐसा कलियुग आयेगा,       ब्राह्मण होके वेद ना जानै, मिथ्या जन्म गवायेगा !         बेटा होके मात-पिता ना चीन्हें, त्रिया से नेह लगायेगा,           और त्रिया होके पति ना चीन्हें, आन पुरुष मन भायेगा !!" "जब-जब बढ़े असुर और अभिमानी तब-तब धरू मनुष का देहा और हरू सकल देश की पीरा।  'पहले बोधू कोली चमारा पीछे जाए राजदरबारा फिर बोधू पंडित काजी फिर जाए सकल संसारा'। कलियुग मध्य सतयुग ल्याऊँ, तातै सत्य कबीर कहाऊँ। परमेश्वर ने कबीर सागर में वर्णन कर रखा है कि यह तत्वज्ञान पूरे विश्व में किस प्रकार फैलेगा.. परमेश्वर ने बताया है कि.. (पहले बोधू कोली चमारा).. परमात्मा सबसे पहले अपना ज्ञान देकर कोली चमारा अर्थात् मध्यम वर्ग के लोगों को अपनी शरण में लेंगे जैसे आज मालिक की शरण में हम सब मध्यम वर्ग(middle class) के निर्धन लोग है। कोई भी higher class का भगत नहीं है सब मध्यम वर्ग के भगत है जी। (पीछे जाए राजदरबारा).. फिर परमात्मा राजदरबारा का नम्बर लेंगे अर...

दहेज- मानवता पर कलंक

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समाज को समय समय पर अनेक सामाजिक कुरीतियों का सामना करना पड़ा जैसे सती प्रथा, बाल-विवाह आदि । परन्तु समाज-सुधारकों ने समाज को इन कुरीतियों से मुक्ति दिलाने के लिए अपना सर्वस्व जीवन न्यौछावर कर दिया और उनके इस बलिदान की वजह से आज समाज सुखी हैं।             आज आधुनिकता के युग मे एक शिक्षित समाज एक भयंकर कुप्रथा का शिकार हो गया हैं और जो समाज को एक दीमक की तरह दिनों दिन खोखला करती जा रही है वो हैं -दहेज। आज इस दहेज रूपी दानव का सबसे बड़ा दंश मासूम बेटियों को झेलनी पड़ रहा है इसी दहेज रूपी दानव की वजह से हर वर्ष न जाने कितनी मासुम बेटियों को इस दहेज की आग में जला दिया जाता हैं। आज जहाँ समाज इस दहेज रुपी दानव से त्रस्त हैं ऐसे समय मे एक समाज सुधारक के रूप में पूर्ण संत अवतरित हुए है जिन्होंने अपने आध्यात्मिक ज्ञान से समाज को नई राह दिखाई हैं  वो हैं- Saint Rampal Maharaj. वर्तमान में इनके आद्यात्मिक ज्ञान से प्रभावित होकर लाखो लोगो ने दहेज रूपी कुप्रथा को त्याग दिया जिससे समाज को जीने की एक नई राह मिली हैं। अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखे संत रामपाल ...