आदिमानव से आधुनिक मानव
इस संसार में अनेक प्रकार के प्राणी हैं जिनमें से एक मनुष्य है। "मनुष्य" उसे कहते हैं जिसमें मनन करने का गुण व शक्ति होती हैं। सभी जीवों में केवल मनुष्य ही है जो अपने विवेक शक्ति का प्रयोग कर सही व गलत का निर्णय स्वयं कर सकता हैं। मानव का उत्थान समय के साथ धीरे धीरे होते अा रहा हैं। आदिकाल से लेकर अब तक मनुष्य में बहुत ही बदलाव देखने को मिला है, चाहे वह शारीरिक बनावट हो, विवेक शक्ति, या आपस में समूहों (समाज) में एक साथ रहना। धीरे धीरे मनुष्य समाज में एक साथ रह कर अपने विवेक शक्ति से अच्छे और बुरे की पहचान कर सकें है। मानव की वर्तमान स्थिति आज का मानव शिक्षित होते हुए भी स्वयं सही गलत की पहचान नहीं कर पा रहा हैं। वर्तमान स्थिति के मावन में भगवान का डर नहीं रहा। वह दूसरों की गलती पर तो बोलता है कि भगवान सब देख रहा हैं, लेकिन खुद दूसरो का बूरा करते हुए इस बात को नहीं याद रखता हैै। वर्तमान में मानव चोरी, डकैती, रिश्वतखोरी, बलात्कार, जीव हिंसा जैसे कुकर्मों को बटोरता जा रहा हैं। और अपने ही कर्म बिगाड़ता जा रहा हैं। कहते है की मानव की असली कमाई उसके अच्छे कर्म, पुण्य ...