आदिमानव से आधुनिक मानव

इस संसार में अनेक प्रकार के प्राणी हैं जिनमें से एक मनुष्य है। "मनुष्य" उसे कहते हैं जिसमें मनन करने का गुण व शक्ति होती हैं।
सभी जीवों में केवल मनुष्य ही है जो अपने विवेक शक्ति का प्रयोग कर सही व गलत का निर्णय स्वयं कर सकता हैं।
मानव का उत्थान समय के साथ धीरे धीरे होते अा रहा हैं।
आदिकाल से लेकर अब तक मनुष्य में बहुत ही बदलाव देखने को मिला है, चाहे वह शारीरिक बनावट हो, विवेक शक्ति, या आपस में समूहों (समाज) में एक साथ रहना।
धीरे धीरे मनुष्य समाज में एक साथ  रह कर अपने विवेक शक्ति से अच्छे और बुरे की पहचान कर सकें है।


मानव की वर्तमान स्थिति

आज का मानव शिक्षित होते हुए भी स्वयं सही गलत की पहचान नहीं कर पा रहा हैं। वर्तमान स्थिति के मावन में भगवान का डर नहीं रहा। वह दूसरों की गलती पर तो बोलता है कि भगवान सब देख रहा हैं, लेकिन खुद दूसरो का बूरा करते हुए इस बात को नहीं याद रखता हैै।
वर्तमान में मानव चोरी, डकैती, रिश्वतखोरी, बलात्कार, जीव हिंसा जैसे कुकर्मों को बटोरता जा रहा हैं। और अपने ही कर्म बिगाड़ता जा रहा हैं।
कहते है की मानव की असली कमाई उसके अच्छे कर्म, पुण्य (राम नाम) हैं, लेकिन वर्तमान में मानव इसे छोड़ माया बटोरने में लगा है जो कभी उसका था ही नहीं और ना ही अंत समय में साथ रहेगा।



संत रामपाल जी महराज कर रहे हैं मानव उत्थान का कार्य।

संत रामपाल जी महराज अपने आध्यात्मिक और अदुतिय सत्संग द्वारा  मानव समाज को ऐसा अध्यात्मिक ज्ञान दे रहे हैं कि वे मानव स्तर को गिराने वाले सभी बुरे कर्मों के दूर हो रहे हैं और अच्छे कर्म (राम नाम) की कमाई कर रहे हैं।
संत रामपाल जी महराज से लाखों लोग शिक्षा पाकर चोरी, डकैती, जीव हिंसा आदि बुराइयों से कोषों दूर हो रहे हैं और मानवता उत्थान का कार्य जैसे :- समय- समय पर ब्लड डोनेशन कैंप लगा कर , ब्लड डोनेट कर रहें हैं,



अभी वर्तमान स्थिति में कोरोना काल (covid- 19) के इस संकट की घड़ी में भूखे लोगो को भोजन पहुंचकर मानवता की मिशाल पेश कर रहे हैं।



और साथ ही संत रामपाल जी महराज अपने सत्संग द्वारा लोगों को अपने मनुष्य जीवन का असली उद्देश्य बता रहे हैं कि मनुष्य जन्म पूर्ण संत से नाम लेकर पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी की भक्ति कर पूर्ण मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्राप्त हुआ है।

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धन्यवाद्

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