Level of education

•शिक्षा का अर्थ" ज्ञान प्राप्त करना जो कि जीवन में उपयोगी हैं।
शिक्षा हमारे जीवन का अभिन्न अंग है

हमारी पहली शिक्षा घर से ही शुरू होती हैं। हमारे व्यवहार में जो दिखाई देता है वह हमारे शिक्षा का ही रूप है। शिक्षा के अच्छे और बुरे स्तर के लिए सबसे पहले ज़िम्मेदार अपने घर के अभिभावक होते हैं। क्योंकि बच्चे सबसे पहले अपने अभिभावकों से ही सीखते हैं। जैसे कहते हैं ना, जैसे खावे अन्न वैसे बने मन।
इसी प्रकार बच्चो को घर जो प्राथमिक शिक्षा व सामाजिक शिक्षा जाती हैं उसे ही वे अपने जीवन में उतारते हैं।

सामाजिक शिक्षा के बाद आती है स्कूली शिक्षा जहा किताबी ज्ञान हमे प्राप्त होता है। लेकिन आज कि बढ़ती हुई टेक्नोलोजी से हमें अच्छी शिक्षा तो प्राप्त हो रही हैं लेकिन हम ज्ञानी अर्थात विद्वान नहीं हो रहे हैं। जैसे कि आधुनिकता में सब डिजिटल होने से अपनी तर्क शक्ति को खोते जा रहे हैं।
...कुछ चीज का उत्तर चाहिए तो सीधे गूगल में खोज लेते हैं। अपने तर्क शिक्षा का उपयोग नहीं कर पाते हैं। शिक्षा की आधुनिकता ने लोगो को काफ़ी लाभ दिए हैं वहीं इसके बहुत सी हानि को भी लोगों को ही भुगतना पड़ा है।
•आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर अपने लिए ही मुसीबत मोल ली है ।जैसे विनाशकारी हाइड्रोजन बम, बड़ी - बड़ी मिसाइल  बना लिए हैं जो मानव जीवन के और पूरी दुनिया के लिए बहुत ही घातक है।
•आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर उसका दुरपयोग......एक दूसरे देश के लिए विनाशकारी हथियार बना कर रहे हैं और एक- दूसरे के दुश्मन बन बैठे हैं।


शिक्षा का वास्तविक महत्व ये है कि हम शिक्षा प्राप्त करके समाज में व्याप्त कुप्रथा, आडम्बर , अंधविश्वास को समाप्त कर आपसी भाईचारा स्थापित करे। अर्थात हमारी शिक्षा तभी सफल मानी जाएगी जब हम उसे अपने जीवन, व्यवहार में लाए।
 जैसे कि अभी देखने में मिल रहा है कि संत रामपाल जी महराज से शिक्षा पाकर उनके शिष्य, लाखो दहेज रहित विवाह करा रहे हैं, जगह- जगह ब्लड डोनेशन कैम्प लगाकर समाज में काफ़ी मदद पहुंचा रहे हैं।



•अभी कॉरोना वाइरस (Covid-19)के चलते देश की संकट की घड़ी में लोगो के घर जा- जा कर लोगो को राहत पैकेज पहुंचा रहे हैं।



•साथ ही संत रामपाल जी महराज पूरे विश्व को अपने ज्ञान से शिक्षा का असली उद्देश्य बता रहे हैं।
•अगर शिक्षा प्राप्त कर अपने मनुष्य जन्म का असली उद्देश्य नहीं जान पाए तो इसका कोई महत्व नहीं है।
•वर्तमान में पूर्ण गुरु के पद पर आसीन संत रामपाल जी महाराज हमारे सभी धर्मो के ग्रंथों को खोल कर हमारे सामने खुद पढ़ कर बता रहे हैं कि हमारे सभी धर्मो के सत ग्रंथो में केवल एक ही पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी का वर्णन है।

अधिक जानकरी के लिए हमारी वेबसाइट देखें www.jagatgururampalji.org


Comments

  1. हमारी शिक्षा तभी कोई मायने तभी हैं जब उससे हम में सही गलत के बीच अंतर करने का ज्ञान हो जाए, लोगो के प्रति दयालुता जगत्रित हो.. और संत रामपाल जी महराज अपने आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से लोगो को यह संदेश दे रहे हैं।

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